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फोटो निबंध : बद्रीनाथ मंदिर की काष्ठकला : हिमालयी शिल्प परंपरा की अनूठी झलक Woodcarving of Badrinath: A Unique Glimpse into the Himalayan Craft Tradition- Lalit Tulera

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• ललित तुलेरा tulera.lalit@gmail.com हि मालय केवल अपनी ऊँची चोटियों, नदियों और प्राकृतिक सौंदर्य के लिए ही नहीं, बल्कि अपनी समृद्ध लोक एवं स्थापत्य कला के लिए भी जाना जाता है। बद्रीनाथ मंदिर की काष्ठकला इसी कलात्मक परंपरा की एक सुंदर झलक प्रस्तुत करती है। मंदिर परिसर और इसके विभिन्न हिस्सों में दिखाई देने वाली लकड़ी की नक्काशी में फूल-पत्तियों, ज्यामितीय आकृतियों और पारंपरिक अलंकरणों के साथ-साथ सूक्ष्म शिल्प कौशल दिखाई देता है। लकड़ी जैसी अपेक्षाकृत नर्म और जीवंत सामग्री पर इतने बारीक आकार उकेरना शिल्पकारों की दक्षता और धैर्य का प्रमाण है। हिमालयी क्षेत्रों में लकड़ी लंबे समय से स्थापत्य का महत्त्वपूर्ण हिस्सा रही है। यहां की जलवायु, स्थानीय वन संपदा और पारंपरिक निर्माण तकनीकों ने एक विशिष्ट काष्ठ शिल्प परंपरा को जन्म दिया। बद्रीनाथ में दिखाई देने वाली काष्ठ सज्जा को इसी व्यापक हिमालयी शिल्प संसार के संदर्भ में देखा जा सकता है। इन नक्काशियों को कैमरे में कैद करते हुए मुझे लगा कि मंदिर की भव्यता केवल उसके धार्मिक महत्त्व या पत्थर की संरचना में नहीं, बल्कि उन बारीक कलात्मक विवरणों में भी...

कुमाऊँ के मंदिरों में प्रणय और कामसूत्र की नक्काशी - Lalit Tulera

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 ललित तुलेरा   ई.मेल- tulera.lalit@gmail.com दुनिया की प्राचीन सभ्यताओं में प्रेम, शारीरिक आकर्षण और प्रजनन कला के महत्त्वपूर्ण विषय रहे हैं। प्राचीन यूनान की मूर्तियों से लेकर रोम के भित्तिचित्रों और जापान की शुंगा चित्रकला तक मनुष्य ने अपनी भावनाओं और शारीरिक अनुभवों को अलग-अलग कलात्मक रूपों में व्यक्त किया। भारत में भी इस परंपरा के अनूठे उदाहरण मिलते हैं। मध्य प्रदेश के खजुराहो और ओडिशा के कोणार्क जैसे मंदिरों में प्रेमी जोड़ों और मैथुन क्रिया के दृश्य पत्थरों पर उकेरे गए हैं। इन मूर्तियों में कला, सौंदर्य और तत्कालीन सांस्कृतिक मान्यताओं के विविध पहलू दिखाई देते हैं। इसी व्यापक परंपरा के बीच कुमाऊँ के मंदिरों की शिल्पकला को देखना भी दिलचस्प है। कुमाऊँ के  नंदा देवी मंदिर  (अल्मोड़ा) और  बालेश्वर मंदिर  (चंपावत) की नक्काशियाँ भी इस दृष्टि से दिलचस्प हैं। हालांकि उपलब्ध पुरातात्त्विक और स्थापत्य अध्ययनों में इन मंदिरों की सभी आकृतियों को सीधे 'कामसूत्र' से जोड़ना सावधानी की मांग करता है; मंदिर शिल्प में दिखाई देने वाले युगल, अलंकरण और मानवीय प्रसंगों को...

'किरमोलिया' वंशवृक्ष : ग्राम- सिमखेत, जिला- बागेश्वर ( उत्तराखंड ), KIRMOLIYA family tree, Vill- Simkhet, District - Bageshwar (Uttarakhand)- Lalit Tulera

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' किरमोलिया' वंशावली : ग्राम- सिमखेत, जिला- बागेश्वर ( उत्तराखंड ) यह वंशावली बागेश्वर जिले में ग्राम सिमखेत  में निवास करने वाले किरमोलिया  वंश की है। इसे मैंने जून 2024 में सिमखेत के ग्रामवासियों श्री गोपाल सिंह किरमोलिया ( पूर्व ग्राम प्रधान), किशन सिंह किरमोलिया ( सेवानिवृत्त भारतीय सैनिक), बहादुर सिंह किरमोलिया, पान सिंह किरमोलिया (अल्मोड़ा प्रवास), इंदिरा देवी और मदुली देवी आदि व्यक्तियों से मौखिक संवाद तथा ग्रामवासियों द्वारा किरमोलिया वंश की पहले से बनाई गई वंशावली से प्राप्त जानकारी के आधार पर तैयार किया था। इस वंशावली का आरंभ श्री   हरक सिंह किरमोलिया  से माना गया है। पारिवारिक जानकारी के अनुसार किरमोलिया वंश के लोग कुछ सौ वर्ष पूर्व गढ़वाल मंडल के चमोली जिले के   बांजबगड़  नामक स्थान से आकर बागेश्वर जिले के अणा,  सिमखेत आदि   स्थानों   में बसे।    ( ठाकुर सिंह किरमोलिया द्वारा बनाई गई किरमोलिया वंश की पुस्तकाकार वंशावली)   आमतौर पर पारिवारिक वंशावलियों में पुरुष सदस्यों का विवरण अधिक मिलता है और स्त्रियों ...

कुमाउनी विवाह निमंत्रण कार्ड, कुमाउनी ब्याक न्यूत कार्ड Kumaoni marriage invitation card- Lalit Tulera

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कुमाउनी विवाह निमंत्रण कार्ड कुमाउनी ब्याक न्यूत कार्ड Kumaoni marriage invitation card कैलीग्राफी और डिजाइन  -  ललित तुलेरा  वट्सऐप नंबर-7055574602 पहला पृष्ठ  दूसरा पृष्ठ तीसरा पृष्ठ  चौथा पृष्ठ