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ललित तुलेरा की किताबें Books of Lalit Tulera

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Lalit Tulera : kumaoni + Hindi Books  ' जो य‌ गङ बगि रै' कुमाउनी कविता संग्रह ( संपादन)  संपादक - ललित तुलेरा   डॉ. चंद्रशेखर पाठक : कुमाउनी रचनाएं संपादन- ललित तुलेरा  'और दुनिया सुंदर नहीं हुई' हिंदी कविता संग्रह - ललित तुलेरा  'और दुनिया सुंदर नहीं हुई' हिंदी कविता संग्रह - ललित तुलेरा   Lalit Tulera : kumaoni + Hindi Books 

कुमाउनी व्याकरण लेखन का इतिहास- History of Kumauni grammar writing- Dr. Dev singh Pokhariya and Lalit Tulera

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• डाॅ. देवसिंह पोखरिया पूर्व प्रोफेसर :  हिंदी, कुमाउनी भाषाविद्   मो.- 09412976889/ई.मेल-profd.pokharia@gmail.com • ललित तुलेरा उप संपादक : 'पहरू' कुमाउनी पत्रिका वट्सऐप-7055574602  /  ई.मेल- tulera.lalit@gmail.com      कु माउनी भाषा के लिखित प्रमाण 1000 ई. के आस-पास से प्राप्त होते हैं। कुमाऊं के चंद शासन काल में प्रारंभिक युग के अभिलेख संस्कृत मिश्रित कुमाउनी और मध्य युग में 17 वीं सदी तक विशुद्ध कुमाउनी में मिलते हैं। प्रारंभिक और मध्य युग की कुमाउनी को अभिलेखीय कुमाउनी कहा जा सकता है। विभिन्न प्राकृतों से अपभ्रंश का विकास हुआ, जिससे हिंदी की विभिन्न सहभाषाएं विकसित हुईं। कुमाउनी का सबसे पहला लिखित साहित्यिक प्रमाण 1728 ई. में मिलता है, जो गद्यानुवाद के रूप में है।  रामभ्रद त्रिपाठी  ने ‘ चाणक्य नीति’  का कुमाउनी में अनुवाद किया था। इसके पश्चात लोकरत्न पंत ‘गुमानी’ ने उन्नीसवीं सदी के आरंभ में कुमाउनी कविताएं लिखी थीं। वे कुमाउनी के आदि कवि माने जाते हैं। तब से कुमाउनी की लिखित साहित्यिक परंपरा निरंतर प्रवाहमान है।  धीरे-धीरे कु...

कुमाउनी कोश निर्माण और व्याकरण लेखन का इतिहास A History of Kumauni Lexicographical works and Grammar Writing- Dev singh Pokhariya and Lalit Tulera

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• डाॅ. देवसिंह पोखरिया पूर्व प्रोफेसर :  हिंदी, और कुमाउनी भाषाविद्   मो.- 09412976889/ई.मेल-profd.pokharia@gmail.com • ललित तुलेरा उप संपादक : 'पहरू' कुमाउनी पत्रिका वट्सऐप-7055574602  /  ई.मेल- tulera.lalit@gmail.com कु माउनी भाषा के लिखित प्रमाण 1000 ई. के आस-पास से प्राप्त होते हैं। कुमाऊं के चंद शासन काल में प्रारंभिक युग के अभिलेख संस्कृत मिश्रित कुमाउनी और मध्य युग में 17 वीं सदी तक विशुद्ध कुमाउनी में मिलते हैं। प्रारंभिक और मध्य युग की कुमाउनी को अभिलेखीय कुमाउनी कहा जा सकता है। विभिन्न प्राकृतों से अपभ्रंश का विकास हुआ, जिससे हिंदी की विभिन्न सहभाषाएं विकसित हुईं। कुमाउनी का सबसे पहला लिखित साहित्यिक प्रमाण 1728 ई. में मिलता है, जो गद्यानुवाद के रूप में है। रामभ्रद त्रिपाठी ने ‘ चाणक्य नीति’ का कुमाउनी में अनुवाद किया था। इसके पश्चात लोकरत्न पंत ‘गुमानी’ ने उन्नीसवीं सदी के आरंभ में कुमाउनी कविताएं लिखी थीं। वे कुमाउनी के आदि कवि माने जाते हैं। तब से कुमाउनी की लिखित साहित्यिक परंपरा निरंतर प्रवाहमान है।  धीरे-धीरे कुमाउनी में साहित्य के साथ ही कोश...