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'हुलेरिया' वंश वृक्ष : ग्राम- सुराग ( मल्ला) जिला- बागेश्वर - ललित तुलेरा Huleriya Genealogy, Vill- Surag, Distt.-Bageshwar- Lalit Tulera

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' हुलेरिया' वंशावली : ग्राम सुराग ( मल्ला ),जिला- बागेश्वर ( उत्तराखंड ) यह वंशावली बागेश्वर जिले में ग्राम सुराग (मल्ला) में निवास करने वाले हुलेरिया वंश की सात पीढ़ियों का पारिवारिक विवरण है। इसे मैंने दिसंबर 2022 में मल्ला सुराग निवासी श्री गंगा सिंह हुलेरिया तथा उनके पिताजी, सेवानिवृत्त भारतीय सैनिक श्री भगवत सिंह हुलेरिया  से प्राप्त मौखिक जानकारी के आधार पर तैयार किया था। ग्राम- सुराग की सेटेलाइट इमेज  इस वंशावली का आरंभ भवान सिंह हुलेरिया से माना गया है। पारिवारिक जानकारी के अनुसार हुलेरिया वंश के लोग कई वर्ष पूर्व चमोली जिले के ग्राम सवाड़ से आकर ग्राम सुराग में बसे थे। वर्तमान वंशावली में सुराग (मल्ला) में भवान सिंह हुलेरिया से आगे की वंश-परंपरा को सात पीढ़ियों तक प्रस्तुत किया गया है। आमतौर पर पारिवारिक वंशावलियों में पुरुष सदस्यों का विवरण अधिक मिलता है और स्त्रियों के नाम प्रायः छूट जाते हैं। इस वंशावली को तैयार करते समय मैंने इस परंपरा से अलग परिवार की स्त्रियों को भी वंशावली में स्थान देने का प्रयास किया है। वंशवृक्ष में स्त्रियों के नाम लाल रंग के अक...

कुमाउनी कोशविज्ञान का इतिहास The History of Kumauni Lexicography - Dr. Dev Singh Pokhariya and Lalit Tulera

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• डाॅ. देवसिंह पोखरिया पूर्व प्रोफेसर :  हिंदी, कुमाउनी भाषाविद्   मो.- 09412976889/ई.मेल-profd.pokharia@gmail.com • ललित तुलेरा उप संपादक : 'पहरू' कुमाउनी पत्रिका वट्सऐप-7055574602  /  ई.मेल- tulera.lalit@gmail.com कु माउनी भाषा के लिखित प्रमाण 1000 ई. के आस-पास से प्राप्त होते हैं। कुमाऊं के चंद शासन काल में प्रारंभिक युग के अभिलेख संस्कृत मिश्रित कुमाउनी और मध्य युग में 17 वीं सदी तक विशुद्ध कुमाउनी में मिलते हैं। प्रारंभिक और मध्य युग की कुमाउनी को अभिलेखीय कुमाउनी कहा जा सकता है। विभिन्न प्राकृतों से अपभ्रंश का विकास हुआ, जिससे हिंदी की विभिन्न सहभाषाएं विकसित हुईं। कुमाउनी का सबसे पहला लिखित साहित्यिक प्रमाण 1728 ई. में मिलता है, जो गद्यानुवाद के रूप में है।  रामभ्रद त्रिपाठी  ने ‘ चाणक्य नीति’  का कुमाउनी में अनुवाद किया था। इसके पश्चात लोकरत्न पंत ‘गुमानी’ ने उन्नीसवीं सदी के आरंभ में कुमाउनी कविताएं लिखी थीं। वे कुमाउनी के आदि कवि माने जाते हैं। तब से कुमाउनी की लिखित साहित्यिक परंपरा निरंतर प्रवाहमान है।  धीरे-धीरे कुमाउनी में साहित्य के...

ललित तुलेरा की किताबें Books of Lalit Tulera

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Lalit Tulera : kumaoni + Hindi Books  ' जो य‌ गङ बगि रै' कुमाउनी कविता संग्रह ( संपादन)  संपादक - ललित तुलेरा   डॉ. चंद्रशेखर पाठक : कुमाउनी रचनाएं संपादन- ललित तुलेरा  'और दुनिया सुंदर नहीं हुई' हिंदी कविता संग्रह - ललित तुलेरा  'और दुनिया सुंदर नहीं हुई' हिंदी कविता संग्रह - ललित तुलेरा   Lalit Tulera : kumaoni + Hindi Books 

कुमाउनी व्याकरण लेखन का इतिहास- History of Kumauni grammar writing- Dr. Dev singh Pokhariya and Lalit Tulera

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• डाॅ. देवसिंह पोखरिया पूर्व प्रोफेसर :  हिंदी, कुमाउनी भाषाविद्   मो.- 09412976889/ई.मेल-profd.pokharia@gmail.com • ललित तुलेरा उप संपादक : 'पहरू' कुमाउनी पत्रिका वट्सऐप-7055574602  /  ई.मेल- tulera.lalit@gmail.com      कु माउनी भाषा के लिखित प्रमाण 1000 ई. के आस-पास से प्राप्त होते हैं। कुमाऊं के चंद शासन काल में प्रारंभिक युग के अभिलेख संस्कृत मिश्रित कुमाउनी और मध्य युग में 17 वीं सदी तक विशुद्ध कुमाउनी में मिलते हैं। प्रारंभिक और मध्य युग की कुमाउनी को अभिलेखीय कुमाउनी कहा जा सकता है। विभिन्न प्राकृतों से अपभ्रंश का विकास हुआ, जिससे हिंदी की विभिन्न सहभाषाएं विकसित हुईं। कुमाउनी का सबसे पहला लिखित साहित्यिक प्रमाण 1728 ई. में मिलता है, जो गद्यानुवाद के रूप में है।  रामभ्रद त्रिपाठी  ने ‘ चाणक्य नीति’  का कुमाउनी में अनुवाद किया था। इसके पश्चात लोकरत्न पंत ‘गुमानी’ ने उन्नीसवीं सदी के आरंभ में कुमाउनी कविताएं लिखी थीं। वे कुमाउनी के आदि कवि माने जाते हैं। तब से कुमाउनी की लिखित साहित्यिक परंपरा निरंतर प्रवाहमान है।  धीरे-धीरे क...