प्रतिभादर्शन: कुमाउनी भाषा की बौद्धिक विरासत का एक दुर्लभ दस्तावेज़ Pratibhadarshan : Harishankar Joshi. Book review : Lalit Tulera
ललित तुलेरा उप संपादक पहरू कुमाउनी पत्रिका tulera.lalit@gmail.com क्या आपने कभी सोचा है कि कुमाउनी भाषा पर ऐसा भी कोई ग्रंथ लिखा गया होगा जिसमें वेद, पाणिनि, भर्तृहरि, शब्दब्रह्म, स्फोटवाद, ध्वनितत्त्व, वर्णवैचित्र्य और आधुनिक भाषाविज्ञान, ये सभी एक साथ मिलते हों? आश्चर्य की बात यह है कि ऐसा ग्रंथ 1964 ई. में प्रकाशित हो चुका था, लेकिन छह दशक से अधिक समय बीत जाने के बाद आज भी कुमाउनी भाषा और साहित्य के अनेक गंभीर पाठक तथा लेखक उससे परिचित नहीं हैं। यह ग्रंथ है- हरिशंकर जोशी द्वारा रचित ' प्रतिभादर्शन (भाषा-तत्त्वशास्त्र)। इस ग्रंथ की विषय-सूची पर एक नज़र डालते ही स्पष्ट हो जाता है कि यह केवल एक पुस्तक नहीं, बल्कि भारतीय भाषा-दर्शन, ध्वनिविज्ञान और कुमाउनी भाषा के गहन अध्ययन का एक महत्त्वपूर्ण शोधग्रंथ है। पहली दृष्टि में इसके शीर्षक से यह भ्रम हो सकता है कि यह भाषाविज्ञान की सामान्य पुस्तक होगी, लेकिन जैसे-जैसे हम इसकी विषय-सूची देखते हैं, यह भ्रम दूर हो जाता है। यह पुस्तक केवल यह नहीं बताती कि भाषा कैसे बोली जाती है या उसके व्याकरण के नियम...