सामूहिक कुमाउनी काव्य संकलनों का इतिहास - ललित तुलेरा
• ललित तुलेरा
उप संपादक-
'पहरू' कुमाउनी पत्रिका
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कुमाउनी साहित्य में सामूहिक काव्य संकलनोंकि लै एक परंपरा छु। कुमाउनी पद्य साहित्य में सामूहिक कविता संकलनोंकि शुरूवात साल 1969 ई. बटी शुरू हैछ, जब गिरीश तिवाड़ी ‘गिर्दा’ और दुर्गेश पंत ल ‘शिखरों के स्वर’ (1969 ई.) किताब तैयार करै।
य किताब कैं आजादी बादकि कुमाउनी भाषा में पैंल किताब लै मानी जां। यो किताब में 1800 ई. बटी 1947 ई. तकाक कुमाउनीक 23 लेखारोंकि कविता इकबट्याई छन। यो किताब में लोकरत्न पंत ‘गुमानी’, कृष्ण पांडे, शिवदत्त सती, गौरीदत्त पांडे ‘गौर्दा’, श्यामाचरण दत्त पंत, चिंतामणि पालीवाल, पार्वती उप्रेती, शैलेश मटियानी, के.सी. भारती आदि कवियोंक कविता शामिल छन। शिखर प्रकाशन, देहलीगेट, अलीगढ़ बै छपी छु।
यैक पछेट लक्ष्मण सिंह नेगी ‘स्नेही’ और रतन सिंह किरमोलिया ज्यूल मिल बेर ‘बुरूंश’ (1981 ई.) सामूहिक काव्य संकलनक संपादन करौ। य किताब कर्ण प्रेस, बागेश्वर बै छपी छु।
जमें कुमाउनी भाषाक 25 लेखारोंकि कबिता एकबटी छन। इमें तीन महिला रचनाकार तारा पांडेय, लीला खोलिया, देवकी महरा शामिल छन। ‘पछयाण’ (1994 ई.) में छपौ, जैक संपादक डाॅ. दिवा भट्ट छन, इमें 11 लेखारोंकि कविता मिलनी। य किताब श्री अल्मोड़ा बुक डिपो, अल्मोड़ा बै छपी छु।
कुमाउनी कवि बालम सिंह जनौटी ज्यूल ‘किरमोई तराण’ (2000 ई.) संपादित करौ, इमें 26 लेखार इकबटयाई छन। यैक प्रकाशन शक्ति प्रकाशन, अल्मोड़ा द्वारा भौ।
इक्कीसूं सदी में 2000 ई. बाद कयेक संजैत काव्य संकलन देखां भई।
इक्कीसूं सदी में 2000 ई. बाद कयेक संजैत काव्य संकलन देखां भई।
डाॅ. गजेन्द्र बटोही द्वारा ‘डांडा कांठा स्वर’ (2002 ई.), डाॅ. गजेन्द्र बटोही और महेन्द्र ध्यानी ज्यूल मिल बेर ‘उड़ घुघुती उड़’ (2005 ई.) गढ़वाली और कुमाउनी रचनाकारोंकि कविताओं संकलन तैयार करी। ‘डांडा कांठा स्वर’ में 22 व ‘उड़ घुघुती उड़’ में 30 कुमाउनी लेखारोंकि कबिता छन।
डाॅ. जगत सिंह बिष्ट द्वारा संपादित ‘उमाव’ (2008 ई.) सामणि आ, जमें 07 लेखारोंकि रचना शामिल छन। य किताब ‘कुमाउनी भाषा, साहित्य एवं संस्कृति प्रचार समिति, कसारदेवी, अल्मोड़ा द्वारा छपी छु।
‘कुमाउनी काव्य संचयन’ (2014 ई.) नामल प्रो. चंद्रकला रावत ज्यूल संपादन करौ, जमें 21 लेखारोंकि रचना मिलनी।
‘फसक’ (2015 ई.) ललित शौर्य द्वारा संपादित कुमाउनी काव्य संकलन छु, जमें 11 लेखार शामिल छन। य किताब में पिथौरागढ़ जिल्लाक रचनाकारोंक रचना छन।
‘हिंकु’ (2017 ई.) में ‘प्रकटेश्वर सृजन मंच’ बागेश्वर तरफ बै छपौ, जैक भाग द्वी में कुमाउनीक 16 लेखारोंकि कबिता मिलनी। य संकलन में सिरफ बागेश्वर जिल्लाक रचनाकारोंक कविता शामिल छन। 2020 ई. में द्वी सामूहिक काव्य संकलन देखण में आई।
मोहन जोशी द्वारा संपादित ‘आँ्ठ’ (2020 ई.) जमें कुमाउनीक 56 लेखारोंक कबिता शामिल छन। य संकलन कुमाउनी में ऐल तकक सबन है ठुल सामूहिक काव्य संकलन छु।
‘बिनसिरि’ (2020 ई.) नामल कुमाउनी और गढ़वाली संजैत काव्य संकलन छपौ, जैक संपादक गढ़वाली लेखार आशीष सुंदरियाल और अनूप सिंह रावत छन। य किताबक दुसर खंड में 56 कुमाउनी लेखारोंकि रचना शामिल छन।
युवा रचनाकार ललित तुलेरा द्वारा ‘जो य गङ बगि रै’ (2021 ई.) तैयार करौ। य किताब में नई पीढ़ी (15-25 उमराक) रचनाकार शामिल छन। य किताब में 17 युवा रचनाकारोंक कविता शामिल छन। इमें आठ कवयित्री शामिल छन।
साल 1977 ई. अल्माड़ बै ‘बास रे कफुवा’ कुमाउनी भाषाक पैंल साइक्लोस्टाइल पत्रिका निकाली गे। यैक संपादक सुधीर साह छी, इमें 27 लेखारोंकि कविता शमिल छन। यैक बाद सिरफ द्वी अंक निकलि सकी। ‘धार में दिन’ और ‘रत्तै ब्याल’ (1979 ई.)। ‘रत्तै ब्याल’ में 22 लेखारोंकि रचना शामिल छन। डाॅ. पवनेश ठकुराठी द्वारा कुमाउनी भाषाकि पैंल ई. पत्रिका ‘प्यौलि’ जनवरी 2020 ई.(पैंल अंक) निकाली गे, उ पुर अंक पद्य में निकलौ, जमें कुमाउनीक अयाण-सयाण 11 लेखारोंकि कबिता शामिल छन। यैक अलावा ‘अचल’, ‘ब्याण ता्र’, ‘आँखर’, ‘बुरूंश’, ‘दुदबोलि’, ‘पहरू’, ‘धाद’, ‘कुमगढ़’, ‘आदलि कुशलि’ कुमाउनी पत्र-पत्रिकाओं में कयेक रचनाकारोंक कविता एक दगाड़ देखण में मिलनी। •••
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