सामूहिक कुमाउनी काव्य संकलनों का इतिहास - ललित तुलेरा
• ललित तुलेरा उप संपादक- ' पहरू ' कुमाउनी पत्रिका वट्सऐप नं. -7055574602 कु माउनी साहित्य में सामूहिक काव्य संकलनोंकि लै एक परंपरा छु। कुमाउनी पद्य साहित्य में सामूहिक कविता संकलनोंकि शुरूवात साल 1969 ई. बटी शुरू हैछ, जब गिरीश तिवाड़ी ‘गिर्दा’ और दुर्गेश पंत ल ‘ शिखरों के स्वर’ (1969 ई.) किताब तैयार करै। य किताब कैं आजादी बादकि कुमाउनी भाषा में पैंल किताब लै मानी जां। यो किताब में 1800 ई. बटी 1947 ई. तकाक कुमाउनीक 23 लेखारोंकि कविता इकबट्याई छन। यो किताब में लोकरत्न पंत ‘गुमानी’, कृष्ण पांडे, शिवदत्त सती, गौरीदत्त पांडे ‘गौर्दा’, श्यामाचरण दत्त पंत, चिंतामणि पालीवाल, पार्वती उप्रेती, शैलेश मटियानी, के.सी. भारती आदि कवियोंक कविता शामिल छन। शिखर प्रकाशन, देहलीगेट, अलीगढ़ बै छपी छु। यैक पछेट लक्ष्मण सिंह नेगी ‘स्नेही’ और रतन सिंह किरमोलिया ज्यूल मिल बेर ‘ बुरूंश ’ (1981 ई.) सामूहिक काव्य संकलनक संपादन करौ। य किताब कर्ण प्रेस, बागेश्वर बै छपी छु। जमें कुमाउनी भाषाक 25 लेखारोंकि कबिता एकबटी छन। इमें तीन महिला रचनाकार तारा पांडेय, लीला खोलिया, देवक...