‘पहरू’ कुमाउनी पत्रिका अप्रैल २०२० में छपी रचनाकार


     पहरू कुमाउनी भाषाक महैनवार छपणी पत्रिका छु। २००८ बटी य पत्रिका कुमाउनी भाषा क विकास में समर्पित छु जमें कुमाउनी में कविता, वंदना ,कहानी, लेख, निबंध, व्यंग्य,  नानिकाथ, उपन्यास अंश, अनुवाद, यात्रा वृतांत, कुमाउनी बाल संसार साहित्य, बातचीत, समाचार, समेत कई विधाओं में रचनाएं छपनी । पहरू उत्तराखंडै ना बल्कि देश भर में जां-जां कुमाउनी समाज छु वां तक डाक ब्यवस्ताक माध्यमल पुजैं ।

(पहरू , अप्रैल २०२० अंक मुखपृष्ठ) 



पहरू अप्रैल २०२० अंक में छपी रचनाकार य परकार छन -



   अगर आपूं लै कुमाउनी भाषा में कविता , लेख, कहानि आदि लेखछा  तो आपूं लै भेजि सकछा आपणि रचना तलि लेखि पत्त पर डाक द्वारा -

        सेवा में 
     संपादक पहरू 
    पहरू संपादकीय कार्यालय-
   इंद्र सदन-सुनारीनौला, अल्मोड़ा
                                       पिन-२६३६०१

या फिर पहरू ईमेल- 
pahru.uttarakhand@gmail.com पर 

 पहरू कुमाउनी पत्रिका दगै जुड़ि बेर आपूं लै कुमाउनी भाषा विकास क य मुहिम में शामिल है सकछा, संपर्क करि सकछा - 
  9412924897 नंबर पर । 




टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

कुमाऊँ के मंदिरों में प्रणय और कामसूत्र की नक्काशी - Lalit Tulera

फोटो निबंध : बद्रीनाथ मंदिर की काष्ठकला : हिमालयी शिल्प परंपरा की अनूठी झलक Woodcarving of Badrinath: A Unique Glimpse into the Himalayan Craft Tradition- Lalit Tulera

'हुलेरिया' वंश वृक्ष : ग्राम- सुराग ( मल्ला) जिला- बागेश्वर - ललित तुलेरा Huleriya Genealogy, Vill- Surag, Distt.-Bageshwar- Lalit Tulera

कुमाउनी विवाह निमंत्रण कार्ड, कुमाउनी ब्याक न्यूत कार्ड Kumaoni marriage invitation card- Lalit Tulera

कुमाउनी भाषा में इस वर्ष (2026) की 07 लेखन पुरस्कार योजनाएं

डाकघट का संक्षिप्त इतिहास ( A Brief History of DANKGHAT)- ललित तुलेरा Lalit Tulera

कुमाउनी व्याकरण लेखन का इतिहास- History of Kumauni grammar writing- Dr. Dev singh Pokhariya and Lalit Tulera

'किरमोलिया' वंशवृक्ष : ग्राम- सिमखेत, जिला- बागेश्वर ( उत्तराखंड ), KIRMOLIYA family tree, Vill- Simkhet, District - Bageshwar (Uttarakhand)- Lalit Tulera

कुमाउनी कोशविज्ञान का इतिहास The History of Kumauni Lexicography - Dr. Dev Singh Pokhariya and Lalit Tulera

बिहार की विश्वप्रसिद्ध ‘मधुबनी’ पेंटिंग के साथ उत्तराखंड की ‘ऐपण’ कला को नया आयाम दे रही हैं जया डौर्बी